जीवराज मेहता अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता साबित करते हुए Peritoneal Surface Malignancy (पेट की परत में फैले कैंसर) के एक अत्यंत जटिल मामले का सफलतापूर्वक उपचार किया है। डॉ. विकास माहेश्वरी, DrNB (Surgical Oncology, FALS – Robotics), एवं उनकी अनुभवी टीम ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से यह उपचार संपन्न किया, जिससे मरीज को नई जिंदगी और कैंसर पीड़ितों को नई उम्मीद मिली है।
Peritoneal Surface Malignancy क्या है?
Peritoneal Surface Malignancy एक ऐसी स्थिति है जिसमें कैंसर शरीर के मूल अंग से फैलकर पेट की अंदरूनी परत (Peritoneum) तक पहुँच जाता है। यह अक्सर ओवरी (अंडाशय) कैंसर, आंत के कैंसर या पेट से जुड़े अन्य कैंसर के बढ़ने पर देखने को मिलता है। इस स्थिति में इलाज जटिल हो जाता है, क्योंकि कैंसर एक स्थान पर सीमित न रहकर पेट की परत में फैल चुका होता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ टीम, सही उपचार योजना और उन्नत सर्जिकल तकनीक की भूमिका निर्णायक होती है।
मरीज की स्थिति और शुरुआती लक्षण
मरीज को लंबे समय से पेट में दर्द, सूजन एवं असहजता की शिकायत थी। विस्तृत जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि कैंसर पेट की परत (Peritoneum) तक फैल चुका था। ऐसे लक्षण अक्सर सामान्य समझकर अनदेखे कर दिए जाते हैं, इसलिए समय पर जांच और विशेषज्ञ से परामर्श अत्यंत आवश्यक है।
ध्यान देने योग्य सामान्य लक्षण:
- लगातार पेट में दर्द या भारीपन
- पेट में सूजन या असामान्य फुलाव
- भूख में कमी और बिना कारण वजन घटना
- लंबे समय तक बनी रहने वाली असहजता
उपचार की योजना: चरणबद्ध और सटीक दृष्टिकोण
डॉ. विकास माहेश्वरी एवं उनकी टीम ने मरीज की स्थिति का आकलन कर एक चरणबद्ध उपचार योजना तैयार की। सबसे पहले रोग के भार को कम करने के लिए 3 साइकल कीमोथेरेपी दी गई। इस चरण से कैंसर का फैलाव नियंत्रित हुआ और सर्जरी के लिए अनुकूल स्थिति बनी।
लगभग 7 घंटे की उन्नत लैप्रोस्कोपिक साइटोरिडक्टिव सर्जरी
कीमोथेरेपी के पश्चात लगभग 7 घंटे तक चली उन्नत लैप्रोस्कोपिक साइटोरिडक्टिव सर्जरी की गई। इस दौरान पेट की प्रभावित परतों, ओमेंटम तथा अन्य कैंसरग्रस्त ऊतकों को सावधानीपूर्वक और सफलतापूर्वक हटाया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इतनी जटिल सर्जरी को मिनिमली इनवेसिव (लैप्रोस्कोपिक) तकनीक के माध्यम से संपन्न किया गया।
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मिनिमली इनवेसिव तकनीक के लाभ
ओपन सर्जरी की तुलना में लैप्रोस्कोपिक तकनीक मरीज को कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है:
- सर्जरी के बाद कम दर्द
- कम रक्तस्राव
- संक्रमण का कम खतरा
- छोटे चीरे और बेहतर रिकवरी
- अस्पताल में कम समय तथा शीघ्र सामान्य जीवन में वापसी
इन्हीं लाभों के कारण सर्जरी के बाद मरीज शीघ्र स्वस्थ होकर घर लौट सकी, जो इस जटिल मामले में एक बड़ी उपलब्धि है।
विशेषज्ञ की राय
समय पर पहचान क्यों है सबसे जरूरी?
कैंसर जैसे रोगों में शुरुआती पहचान उपचार की सफलता को कई गुना बढ़ा देती है। यदि पेट में लंबे समय तक दर्द, सूजन या असहजता बनी रहे, तो उसे नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञ से समय पर परामर्श, सही जांच और उचित उपचार योजना मरीज को बेहतर परिणाम और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर देती है।
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ENT Surgery & Treatmentअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या Peritoneal Surface Malignancy का इलाज संभव है?
हाँ, चयनित मामलों में आधुनिक तकनीकों जैसे कीमोथेरेपी और उन्नत साइटोरिडक्टिव सर्जरी के संयोजन से इसका सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार संभव है। उपचार की सफलता रोग की स्थिति, समय पर पहचान और विशेषज्ञ टीम पर निर्भर करती है।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ओपन सर्जरी से बेहतर क्यों मानी जाती है?
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे कम दर्द, कम रक्तस्राव, संक्रमण का कम खतरा और तेज रिकवरी जैसे लाभ मिलते हैं। इससे मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाते हैं।
किन लक्षणों पर विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए?
लगातार पेट दर्द, पेट में सूजन, भूख में कमी या बिना कारण वजन घटने जैसे लक्षण दिखाई दें तो शीघ्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
निष्कर्ष
जीवराज मेहता अस्पताल में डॉ. विकास माहेश्वरी एवं उनकी टीम द्वारा किया गया यह सफल उपचार दर्शाता है कि उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता के साथ जटिल कैंसर मामलों में भी बेहतर परिणाम संभव हैं। समय पर पहचान, सही उपचार योजना और अनुभवी टीम के माध्यम से कैंसर पीड़ितों को नई उम्मीद और बेहतर जीवन की ओर ले जाया जा सकता है।